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Forest Resources Survey - A Glimpse


वन साधन सर्वेक्षण, अंचल, राँची द्वारा 2006 से 2011 तक कराए गए वन साधन सर्वेक्षण प्रतिवेदन का सारांश प्राचीन काल से ही जीव-जन्तु एवं वन का अन्योन्याश्रय संबंध रहा है। वनो के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और परिस्थितिकीय महत्व से हम सभी विहित है। वर्तमान में वनो का प्रबंधन वैज्ञानिक ढंग से और सतत् पोषणीय वन प्रबंधन को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इस कार्य के लिए भारत सरकार द्वारा मानक और सुचक का निर्धारण किया गया है। सर्वेक्षण कार्य राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता 2004 में दिए गए निर्देष एवं अनुक्रमणिका के अनुसार किया गया। वनो को सही ढंग से प्रबंधन के लिए यह आवष्यक है कि सभी वनों की संनिधि, प्रजातिवार, आयुवर्ग, आयतन, स्थल की गुणवता, विभिन्न प्राकृतिक एवं जैविक दबाव आदि जानकारी वन साधन सर्वेक्षण द्वारा सम्पन्न किया जाता है। वन साधन सर्वेक्षण कार्य के लिए चिन्हित अंचल की सारी जानकारी को प्राप्त किया जाता है। सर्वेक्षण में अंचल की प्रतिवेदन के लिए नमूने से वृक्षों की आयतन पुर्नजनन, प्राकृतिक घटकों एवं जैविक कारको से आपसी संबंधों की संपूर्ण जानकारी के लिए दो तरह के नमूनों से लिया गया- रैण्डम सेम्पलिंग, नन रैण्डम सेम्पलिंग है। यह उद्देष्य लेते हुए वन सर्वेक्षण कार्य झारखण्ड के विभिन्न प्रमण्डलों में 2006 से किया गया - जिसमें चतरा उत्तरी वन प्रमंडल, गिरिडिह वन प्रमंडल, राँची पूर्वी वन प्रमंडल, धालभूम वन प्रमंडल, सरायकेला वन प्रमंडल का सर्वेक्षण किया गया। इस सर्वेक्षण में वनों की वर्तमान में प्राकृतिक अवस्था, वनों का उपयोग, वनों पर निर्भरता, जनजातियां, जनजातियों की जीवन काल में वनों का महत्त्व, आबादी प्रमंडलों की व्यवसाय, औषधीय पौधा इत्यादि का कार्य नमूनों द्वारा प्रतिवेदित किया गया। साथ ही साथ ग्रामों का सामाजिक एवं आर्थिक सर्वेक्षण भी किया गया। सर्वेक्षण में पाया गया प्रतिवेदन को दर्षाया जा रहा है। 1. वनों की अधिसूचित क्षेत्र गिरिडीह वन प्रमंडल 142388.22 हेक्टेयर, धालभूम वन प्रमंडल 88968.348 हेक्टेयर, सरायकेला वन प्रमंडल 52327.29 हेक्टेयर, राँची वन प्रमंडल 713.067 वर्ग किलोमीटर फैला है। वनों में वृक्षों की औसत संख्या- गिरिडीह 401, चतरा 251.341, धालभूम 250.33704, सरायकेला 231.66167, राँची 462 प्रति हेक्टेयर पाया गया। औसत आयतन प्रति हेक्टेयर गिरिडीह में 20.72 घन मीटर , चतरा 21.973 घनमीटर, धालभूम 28.15571 घनमीटर, सरायकेला 26.01811 घनमीटर एवं राँची में 44.27 घनमीटर है। 2. मुख्य प्रजाति साल प्रति हेक्टेयर औसत संख्या गिरिडिह में 224, धालभूम में 111.00921, सरायकेला में 99.87409, राँची में 259 मिला, जिसकी औसत आयतन गिरिडिह 20.72 घनमीटर, धालभूम 11.66316 घनमीटर, सरायकेला 10.40554 एवं राँची में 17.37 घनमीटर प्रति हेक्टेयर है। 3. इन सभी प्रमंडलों की सर्वेक्षण में ज्ञात हुआ कि वनो में वृक्षों की प्रजाति साल, आसन, धौठा, महुआ, सीधा, हर्रे, बहेड़ा, पियार, सेमल, सलई, केन्द, करम, डोका, अकेषिया, भेलवा, काजू, चकुण्डी, पलास, शीषम, कुसुम, पंदन, अर्जुन, गम्हार इत्यादि है। धालभूम, सरायकेला एवं राँची में वन प्रमंडलों में वृक्ष प्रजातियों का पूर्नजनन संतोषजनक नहीं है। अधिकतर वन जैविक दबाव से अत्यधिक प्रभावित है। अधिकांष तरूण आयु के वृक्ष के साथ परिपक्व एवं अतिपरिपक्व आयु के वृक्ष काफी कम संख्या में है। गिरिडीह वन प्रमंडल में अधिकतर वन जैविक दबाव से अवकृष्ट होने से कालान्तर में प्रमंडल के वनों में बदलाव आया है। गिरिडीह वन प्रमंडल में वर्ष 2005-06 में 400 हेक्टेयर में रतनजोत, नीम आदि का पौधारोपण छव्टव्च् द्वारा प्रदत राषि से की गई है। जो प्रषंसनीय है। चतरा उत्तरी वन प्रमंडल में ज्यादातर वन अवकृष्ट है। प्रतापपुर एवं कुन्दा में कुछ अच्छे वन है।